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Tuesday, September 17, 2024

तंत्र मन्त्र से जीवन में सफलता कितनी सम्भव है

Tuesday 16th September 2024 at 6:45 PM

 यह आस्था और साधना की शिद्दत पर ही निर्भर करेगा 


लुधियाना: एक तपोबन और मंदिर भूमि:17 सितंबर 2024:( मीडिया लिंक//तंत्र स्क्रीन डेस्क)::

बहुत से मामले और बहुत सी बातें बिलकुल सच होते हैं लेकिन उनका सच दिखाई नहीं देता। उनका कोई सबूत भी नहीं होता। उन्हें साबित करना संभव नहीं होता। बहुत से मामलों में सच जैसा कुछ दिखाई तो देता है लेकिन होता वह झूठ ही है। विज्ञान की प्रयोगशाला में सब कुछ साबित करना संभव भी नहीं होता। यही सच्चाई तंत्र मंत्र और यंत्र के प्रयोग पर भी लागू होती है। इसे विश्वास  नहीं  सवालों के चश्मे से देखना उचित भी नहीं क्यूंकि तंत्र मंत्र उन लोगों के बिगड़े हुए काम ज़रूर बना देते हैं जिनका आत्म विश्वास डगमगा चुका होता है। जिन्हें खुद पर विश्वास नहीं रहा होता। तंत्र मंत्र उन्हें फायदा पहुंचाते हैं। 

इसी तरह के ढंग तरीकों से उनके मन की एकाग्रता भी बढ़ती है और दिमाग की भी। तंत्र-मंत्र-यंत्र और साथ में  सामूहिक जाप उनमें शक्ति जगाता है। यह जाएगी हुई शक्ति ही उनमें एक नए जोश का संचार करती है। आप इस शक्ति को कोई भी नाम दे सकते हैं। वैसे जिस शक्ति के नाम से जाप हो रहा होता उस समय साधक के सामने वही शक्ति साकार  हुई होती है।  अल्पकाल की सिद्धि भी कह सकते हैं। जाप रोज़ हो रहा हो तो यही स्थाई सिद्धि भी बन जाती है। 

तंत्र मन्त्र और यंत्र का प्रयोग यूं तो व्यक्तिगत और आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। लेकिन आजकल हर रोज़ की ज़िन्दगी में आने वाली छोटी मोती ज़रूरतों के लिए भी इस तरह के प्रयोग होने लगे हैं। वास्तव में यह एक प्राचीन पद्धति है जो विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति और अभिप्रेत शक्तियों के प्रकटीकरण के लिए उपयोगी मानी जाती है। इसके वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक आधार होते हैं। अगर कोई व्यक्ति आध्यात्मिक तौर पर जाग जाता है तो उसके काम खुद-ब-खुद बनने लगते हैं। उसके सामने कोई गलत व्यक्ति आने से घबराने लगता है। शक्ति का जागना यही होता है। 

तंत्र मन्त्र का प्रभाव व्यक्ति के निश्चित उद्देश्यों और उपास्य देवता/शक्ति के संबंध में भी निर्भर करता है। कुछ लोग इसे अपने साधना और स्वयं सुधार के लिए उपयोग करते हैं, जबकि दूसरे लोग यह उपयोग विशेष प्रभावों, जैसे धन, स्वास्थ्य, संघर्ष, प्रेम आदि की प्राप्ति के लिए करते हैं। इस तरह के दुनियावी काम तो अपने आप बनने लगते हैं। उनका प्रभामंडल भी सुधरने लगता है। चेहरे की चमक भी बढ़ जाती है। 

तंत्र मन्त्र के प्रभाव को व्यक्ति के श्रद्धा, विश्वास, साधना की क्षमता, उचित नियमों का पालन और निरंतरता प्रभावित कर सकते हैं। तंत्र मन्त्र की सफलता परिणाम व्यक्ति की अन्तरंग स्थिति, कर्म, दैवीय अनुमति आदि पर भी निर्भर करते हैं। साधक अंदर से जितना शुद्ध और सच्चा होगा उसे फायदा भी उतना बड़ा और जल्दी होने लगेगा। जो साधक साधना में ईमानदार नहीं होते उनकी साधना फलित नहीं होती।  मामला उल्टा भी पढ़ जाता है। 

हालांकि, तंत्र मन्त्र का उपयोग करने के दौरान सभी सावधानियां और सम्पूर्णता के साथ कार्य किया जाना चाहिए। यह मान्यता है कि तंत्र मन्त्र का दुरूपयोग अनुकरणीय प्रभावों के साथ आएगा और इससे दुष्प्रभाव भी हो सकता है। यह सब साधक की नीयत पर निर्भर करता है।  साफ़ है तो आपके  परिणाम भी जल्द आने लगेंगे। 

सफलता व्यक्ति की साधना, अध्ययन, कर्म और परिश्रम पर निर्भर करती है। तंत्र मन्त्र का प्रयोग उन लोगों द्वारा किया जाता है जो निरंतर अभ्यास करते हैं, शिक्षा प्राप्त करते हैं, आदर्शों का पालन करते हैं और नियमित रूप से अपनी साधना को जारी रखते हैं। निरंतरता और शुद्धता इस मामले में बहुत महत्व रखती है। 

च्छी गुरुभक्ति, निष्ठा, निरंतरता और सम्पूर्णता के साथ तंत्र मन्त्र के प्रयोग से सफलता की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन इसका प्रयोग समय-समय पर अनुभवित और निश्चित गतिविधियों के साथ ही करना चाहिए। परंतु एकदिवसीय प्रयासों से मानसिक, शारीरिक या आर्थिक अभिवृद्धि की प्राप्ति निश्चित नहीं होती है। यह एक संशोधित प्रकृति और प्रयोग के लिए अवधारित कार्य है जो समय, तत्परता और समर्पण की मांग करता है। शिद्दत के साथ पूरा समर्पण, पूरी भक्ति, पूरी शुद्धता अगर हैं तो आप का मकसद सफल रहेगा। 

आप अगर ईमानदारी से समर्पित हो कर साधना करते हैं तो यकीन रखिए फायदे भी ज़रूर होंगें। शक्ति जागेगी तो आपको इसका अहसास भी कराएगी। 

Sunday, July 14, 2024

कैसे मिलते हैं तंत्र मार्ग पर सही रास्ते और सच्चे गुरु

तंत्र की हकीकत--प्रमाणिकता और इतिहास....! 

लुधियाना: 13 जुलाई 2024: (के. के.सिंह//तंत्र स्क्रीन डेस्क)

तंत्र को मानने वालों की संख्या न मानने वालों से आज भी ज़्यादा है। केवल गांवों में ही नहीं बल्कि शहरों में भी। देश में ही नहीं विदेशों में भी।  बस अलग अलग जगहों पर इसका रंग रूप अलग हो सकता है। अफ्रीका के तंत्र की बहुत सी कहानियों पर तो बहुत दिलचस्प नावल भी लिखे गए थे। किसी भी इंसान का पुतला बना कर उसे सुईयां चुभो चुभो कर और मंत्र पढ़ कर उसे बिमार करना और धीरे धीरे मौत के घात उतार देना अफ्रीकी तंत्र में आम रहा है। हालांकि विज्ञानं और तर्कशील सोच वालों ने इसे कभी सच नहीं माना लेकिन फिर भी बहुत बड़ी संख्या में लोगों की इस में आस्था और मान्यता निरंतर बनी हुई है। 

अगर हम तंत्र की हकीकत--प्रमाणिकता और इतिहास पर चर्चा करें तो बहुत सी बातें इसके हक़ में भी मिलेंगी और विरोध में भी। जो लोग इसके हक़ में हैं वो बहुत सी बातें बताएंगे जो सबूत जैसी ही लगेंगी। इनमें पढ़े लिखे लोग भी अक्सर शामिल होते हैं। 

जो लोग तंत्र के हक़ में नहीं हैं वे भी बंटे हुए हैं। उनमें से अधिकतर लोग ऐसे हैं जो दबे दबे से स्वर में इसका विरोध करते हैं खुल कर नहीं। उनके स्वर में भय मिश्रित सुर को भी महसूस किया जा सकता है। उन्को खुद चाहे तंत्र प्रयोग का कोई भी अच्छा या बुरा अनुभव न रहा हो लेकिन किसे से सुना सुनाया कोई भयानक अनुभव ज़रूर याद रहता है और उसका भय उनकी आंखों में महसूस कीजै जा सकता है। कई लोग ऐसे में घबरा कर ऐसा भी कहते हैं हमें इस पर कुछ नहीं कहना। आपको पता नहीं यह चीज़ें बहुत भरी होती हैं। 

तंत्र की उत्पत्ति और इतिहास

तंत्र एक प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा है, जिसकी जड़ें वैदिक काल में पाई जाती हैं। इसका उल्लेख वेदों, उपनिषदों, पुराणों और अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। तंत्र साधना का विकास मुख्यतः गुप्त काल (4वीं से 6वीं सदी) में हुआ, जब इसे बौद्ध, जैन और हिंदू परंपराओं में अपनाया गया। बहुत से समुदायों और संगठनों ने इसे धीरे धीरे पूरी तरह से अपना लिया। अब अलग अलग नामों से तंत्र हर क्षेत्र और सम्प्रदाय में मौजूद है। 

केवल इतना ही नहीं छोटे छोटे डेरों और मज़ारों पर भी अक्सर तंत्र के क्रियाकलाप किए जाते हैं। लोग झाड़ा करवाने वहां जाते हैं और उसके बाद वे पूरी तरह से ठीक होने का दावा भी करते हैं। ीा मामले में क्या क्या संभव है इसकी चर्चा भी हम अलग से किसी पोस्ट में करेंगे ही। 

तंत्र के सिद्धांत गहरी बातें करते हैं

तंत्र का मुख्य उद्देश्य आत्मा और परमात्मा के मिलन को प्राप्त करना है। यह यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाता है और मानता है कि संसार को त्यागने के बजाय, उसकी वास्तविकता को समझकर और उसमें रहकर आत्मा की उन्नति की जा सकती है। तंत्र साधना में मंत्र, यंत्र, और विभिन्न प्रकार की ध्यान विधियों का प्रयोग होता है। इन विधियों को समझना और करना सहज नहीं होता लेकिन फिर भी बहुत से लोग ऐसा करते हैं। 

तंत्र और योग का संबंध 

शरीर शुद्ध और निरोग न हो तो तंत्र की बात तो दूर साधारण मेडिटेशन भी संभव नहीं रहती। शरीर की निरोगता और उसका बलवान होना आवश्यक है। शरीर की शक्ति अर्जित करने के बाद ही मन को बलवान बनाना सिखाया जाता है। इसके बाद आत्मा की शक्ति को जगाने और उसे बढाने की विधियां आती हैं। वास्तव में तंत्र और योग का गहरा संबंध है। तंत्र साधना में ध्यान, प्राणायाम, मुद्रा और बंध जैसे योग के अंगों का उपयोग किया जाता है। तंत्र साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कुंडलिनी योग है, जिसमें शरीर में स्थित ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को जागृत किया जाता है। जो साधक इन रहस्यों को समझ जाता है उसके लिए तंत्र साधना के मर्म तक पहुंचना भी संभव हो जाता है। 

तंत्र साहित्य के क्षेत्र 

यूं तो तंत्र में बहुत सा साहित्य शामिल है जिसे गिना भी नहीं जा सकता। किसी बड़े पुस्तकालय या पुस्तक बिक्री केंद्र में जाएं तो तंत्र पर बहुत सी पुस्तकें और ग्रंथ वहां देखने को मिलेंगे। हर पुस्तक का कवर लुभावना होगा। तस्वीर रहसयमय और नाम अपने आप में बहुत कुछ समेटे होगा। लेकिन इसमें सच्चे तंत्र साहित्य को कोई सच्चा साधक या गंभीर पाठक ही समझ पाता है। 

तंत्र साहित्य में विभिन्न ग्रंथ शामिल हैं, जैसे कि शैव आगम। भगवान शिव के भक्तों में शैव आगम से सबंधित ये ग्रंथ बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। साधक भगवान शिव को सर्वोच्च देवता मानते हैं। ओशो ने भी तंत्र की जिन 112 विधियों का उल्लेख किया है वह बहुत अर्थपूर्ण है। तंत्र पर ओशो के प्रवचनों पर आधारित बहुत सी किताबें भी मार्कीट में हैं। ख़ास बात यह है कि इन 112 विधियों में से कोई न कोई ऐसी विधि सभी को मिल जाती है जो उसकी शरीरक सरंचना, मन की अवस्था, समय की अनुकूलिता और हर मामले में रास आ ही जाती है। 

इसी तरह शाक्त आगम का क्षेत्र भी बहुत अलग और विशाल है। इस क्षेत्र से जुड़े ग्रंथ देवी की पूजा पर आधारित होते हैं। इन ग्रंथों में तंत्र से सबंधित विधियां भी बहुत गहन होती हैं। इन विधियों के लिए अग्रसर होना हो तो साधक को बहुत तैयारी भी करनी पड़ती है। इन विधियों में देवी के रूप को बहुत विधि से ध्याना होता है। देवी को बुलाने और उसके आने पर जो जो करना होता है उसके पूरे नियम भी होते हैं। इसमें क्यूंकि मुख्यता देवी को मां के रूप में पूजा जाता है तो साधक के मन में यह बात पूरी मज़बूती से बनी रहती है कि मैं मां की संतान हूं इसलिए मां मुझे मेरी हर बुराई और पाप के साथ स्वीकार करेगी और मुझे क्षमा करेगी। इस भावना से साधक की आत्मिक प्रगति तेज़ी से होने लगती है। उसका शरीर भी शुद्ध और बलवान होने लगता है और मन भी मज़बूत बन जाता है। 

तंत्र साधना से जुड़े साहित्य और ग्रंथों में वैष्णव आगम  ग्रंथ  महत्वपूर्ण हैं। ये विष्णु और उनके अवतारों की पूजा पर केंद्रित हैं। वर्ष 1972  में आई फिल्म हरी दर्शन एक तरह से इन्हीं ग्रंथों पर आधारित थी। निर्देशक थे चंद्रकांत और मुख्य कलाकारों में थे दारा सिंह। फिल्म की कहानी प्रहलाद भक्त पर आधारित थी और गीत संगीत भी बेहद जादू भरा था। बालक प्रह्लाद की भूमिका निभाई थी सत्यजीत पुरी ने। 

आखिर में यह उल्लेख आवश्यक है कि तंत्र का आधुनिक संदर्भ बहुत प्रदूषित जैसा हो गया है। आजकल तंत्र को अक्सर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, जिससे इसकी वास्तविकता और महत्व धुंधला हो जाता है। तंत्र की सच्ची साधना में नैतिकता, स्व-अनुशासन और गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष महत्व है। इसलिए इस तरफ भी ध्यान दिया जाना आवश्यक है। 

कुल मिलकर तंत्र एक समृद्ध और जटिल परंपरा है, जिसका इतिहास और प्रामाणिकता गहन अध्ययन और अनुभव से ही समझा जा सकता है। यह केवल एक साधना पद्धति नहीं है, बल्कि जीवन को देखने और समझने का एक व्यापक दृष्टिकोण है, जो व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास में सहायक होता है। इसकी सच्ची खोज केवल किताबों से कुछ वीडियो चैनल देख कर नहीं हो सकती। अंतर्मन में तंत्र के लिए सवयं की प्यास जागने पर ही रास्ते मिलते हैं और गुरु भी। 

Tuesday, June 13, 2023

तंत्र की गहन शिक्षा और साधना ही दे सकती है सिद्धियों की कृपा

Tuesday 13th June 2023 at 05:45 PM

 उचित मार्गदर्शन के बिना न रखें इन रास्तों पर एक भी कदम 

लुधियाना: 13 जून 2023: (तंत्र स्क्रीन डेस्क):: 

*सुयोग्य गुरु का मार्गदर्शन ही दे सकता है पूरा लाभ 

*क्या तंत्र साधना से आयु और स्वास्थ्य के लिए हो सकता है लाभ?

*क्या इस रह पर चल कर मिल सकती है दौलत और शोहरत?

*अगर मन में सच्ची प्यास है तो सच्चा गुरु स्वयं आपको खोज लेगा!

योग, तंत्र और सिद्धि हमारे समय से भी पहले से उपयोग में हैं। यह विज्ञान की एक अलौकिक सी शाखा है जो अधिकतर लोग नहीं जानते हैं और जिसके बारे में शायद बहुत से लोगों की भ्रमित धारणाएं होती हैं। तंत्र और सिद्धि के इस्तेमाल से लोग अपनी आयु और स्वास्थ्य को स्थिर और स्वस्थ रखते हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम सही तरीके से तंत्र और सिद्धियों का इस्तेमाल करना सीखेंगे जो आपके जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। इस ब्लॉग पोस्ट के जरिए हम आपको तंत्र और सिद्धियों के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे जो आपकी आयु और स्वास्थ्य की देखभाल करने में मदद करेगी।

तंत्र और सिद्धि क्या होते हैं? तंत्र साधना से शक्ति भी मिलती है और सिद्धि भी लेकिन रास्ता कम कठिन नहीं होता। तंत्र की साधना के लिए पहले स्वयं में शरीरक बल की भी आवश्कता पड़ती है, बुद्धि बल की भी और मनोबल की भी। तब कहीं जा कर आत्मिक बल सक्रिय होता है और साधना में सफलता मिलने के आसार बनने लगते हैं।  आम और कमज़ोर इन्सान तो आरम्भिक दौर में ही डर कर इस मार्ग पर बढना छोड़ देता है। इस मार्ग पर निरंतर चलने के लिए शक्तियों के भंडार अर्जित करने पड़ते हैं। तंत्र साधना अपने घर में हो, किसी सुनसान जगह पर बने किसी मन्दिर में या फिर श्मशान में-हर जगह पर कदम कदम पर परीक्षा जैसी स्थितियां बनती हैं। तंत्र साधनामें अगर साधक बुरी तरह डर जाए तो हार्ट अटैक जैसी बहुत सी समस्याएं पैदा होने के खतरा बना रहता है इस लिए अपने शरीर की रक्षा के उपाय सबसे पहले कर लिए जाने चाहियें।  

गौरतलब है कि तंत्र और सिद्धि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया ही है जो अधिकतर भारतीय धर्म और तंत्र के अनुयायियों द्वारा उपयोग की जाती है। अब यह बात अलग है कि इसका अधिकतर विज्ञान धीरे धीरे लुप्त होता चला गया। तंत्र की ये सभी प्रक्रियाएं धार्मिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाती रहीं हैं और विभिन्न साधनों व साधकों द्वारा की जाती हैं जो स्वयं में अद्भुत शक्तियों को लाया करते थे। 

तंत्र और सिद्धि का उपयोग व्यक्तिगत उन्नति और शारीरिक आरोग्य के लिए किया जाता है। तन,  आत्मा  शक्तियां बढ़ाना बहुत पहले बहुत ज़रूरी समझा जाता था। इसके अलावा, इन प्रक्रियाओं का उपयोग तनाव से मुक्ति, शांति और अधिक समझदार जीवन जीने में मदद मिलती है। इन प्रक्रियाओं का उपयोग प्राकृतिक तरीकों से अस्थिर मनोवैज्ञानिक समस्याओं से निपटने में भी किया जाता है। 

अब उल्लू के शरीर का कौन सा भाग कब और कहां काम आता है इसका पता तो बाद में किया जा सकता है लेकिन उल्लूक सिद्धि से भी पहले और अन्य सबसे पहले अपने स्वयं के शरीर का हर रहस्य पता लगाना ज़रुरी होता है। मानव शरीर की सरंचना इतनी दुर्लभ है कि विकसित विज्ञान आज भी इसके सामने चकरा जाता है। शरीर के बहुत से रहस्य ऐसे हैं जिनकी सही जानकारी अगर पता चल जाए तो इसे साधना सहज हो जाता है। शरीर और मन को साधने की प्रक्रिया के दौरान ही सिद्धियों जैसा आभास होने लगता है। सर्दी, गर्मी और मौसम की मार बेअसर होने लगती है। बातों में मधुरता के साथ साथ एक दैवी पभाव भी आ जाता है जिससे सद्ध्क की हर बात हर जगह मानी जाने लगती है।

इस शुरूआती साधना के कुछ पड़ाव पूरे करने के बाद ही साधना की कठिनाई और स्तर भी बढ़ने लगते हैं। तन्त्र और सिद्धियों के विभिन्न उपयोग विभिन्न तरह के अनुभव देने लगते हैं। बौद्ध तंत्र और जैन तंत्र साथ मुस्लिम तंत्र भी लोकप्रिय रहा है। 

तंत्र और सिद्धियों का सही उपयोग चिरआयु रहने और पूरी तरह से स्वस्थ रहने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इन तंत्रों और सिद्धियों के विभिन्न उपयोग हैं जो आप अपने जीवन में शामिल कर सकते हैं। एक बहुत सामान्य उपयोग है तंत्रों और सिद्धियों का उपयोग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए। आप अपनी चिंताओं को कम करने के लिए तंत्रों और सिद्धियों का उपयोग कर सकते हैं। इन तंत्रों और सिद्धियों का उपयोग आपको एक अधिक सकारात्मक जीवन जीने में मदद कर सकता है। आप तंत्रों और सिद्धियों का उपयोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ संयोजित कर सकते हैं। इन तंत्रों को उपयोग करने की एक और विशेषता है कि आप इन्हें अपने घर में भी उपयोग कर सकते हैं। आप इन तंत्रों का उपयोग घर की सफाई, कुछ विशेष उद्योगों में सफलता, स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए कर सकते हैं। इन तंत्रों का उपयोग आपके जीवन को आसान बना सकता है। आप इन तंत्रों का उपयोग अपनी जरूरत के अनुसार कर सकते हैं। आप अपने दुखों को कम करने के लिए सिद्धियों का उपयोग कर सकते हैं। सिद्धियों का उपयोग आपको बड़े सपने देखने में मदद कर सकता है। तंत्रों और सिद्धियों का उपयोग करने से आप खुशहाल और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। इसका अनुभव थोड़ी सी साधना के बाद ही होने लगता है। निरंतर प्रयास की अपने आप में ही काफी महत्ता होती है। 

इस तरह तंत्र और सिद्धियों के लाभ आयु और स्वास्थ्य के लिए लोकप्रिय भी रहे हैं। ज्योतिष, वास्तु, और तंत्र-मंत्र सिद्धि आदि को दुनिया भर में लोग बहुत शक्तिशाली मानते हैं। वे अपने जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए इनका सही इस्तेमाल करते हैं। तंत्र और सिद्धियों के इस्तेमाल से आप अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं और अपनी आयु और स्वास्थ्य को भी सुधार सकते हैं। तंत्र और सिद्धियों का सही इस्तेमाल करने से आप अपने जीवन को और बेहतर बना सकते हैं। बहुत से लोग तंत्र और सिद्धियों का इस्तेमाल सिर्फ अपनी समस्याओं को हल करने के लिए करते हैं। लेकिन इनके इस्तेमाल से आप अपनी आयु और स्वास्थ्य को भी सुधार सकते हैं। तंत्र और सिद्धियों की मदद से आप अपने जीवन में एक नए उलझन से निपट सकते हैं और अपनी स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं। तंत्र और सिद्धियों के इस्तेमाल करने से आप अपनी आयु को भी बढ़ा सकते हैं और अपने जीवन की दिशा को निर्देशित कर सकते हैं। इसलिए, तंत्र और सिद्धियों का सही इस्तेमाल करने से आप अपनी आयु, स्वास्थ्य, और जीवन को बेहतर बना सकते हैं। अपनी मुसीबतों को काम कर सकते हैं और अपनी क्षमताओं को बढ़ा  सकते हैं छोटी मोती सीढ़ी सरल साधनाओं से भी बहुत सी सिद्धियां मिलने लगती हैं। 

इस ब्लॉग पोस्ट में, हमने तंत्र और सिद्धियों के सही इस्तेमाल के बारे में जाना। हम जानते हैं कि तंत्र और सिद्धियों का सही इस्तेमाल हमारे आयु और स्वास्थ्य के लिए कितना महत्वपूर्ण है। इनका सही इस्तेमाल हमें आर्थिक समृद्धि, शांति, सम्पूर्णता और स्वस्थ जीवन जीने में मदद करता है। अतः, हमें तंत्र और सिद्धियों का सही इस्तेमाल करना चाहिए। अगर हम तंत्र और सिद्धियों को सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं तो हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। इनका सही इस्तेमाल हमें आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है। यह हमें आत्मविश्वास देता है कि हम अपने जीवन में कुछ भी हासिल कर सकते हैं। इसलिए, यदि हम तंत्र और सिद्धियों का सही इस्तेमाल करना सीखते हैं तो हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। सभी मज़हबों में दैनिक पूजापाठ से जुड़ीं बातें तंत्र का ही बस उतना सा मामूली हिस्सा हैं जो आम जनमानस के लिए ज़रूरी समझा गया। बाकी ज्ञान को छुपा लिया गया था। तंत्र की शक्ति और सिद्धियां सुयोग्य पात्र को ही मिल सकें इसका पूरा ध्यान रखा जाता था। कुछ धार्मिक संगत आज के युग में इस तरह की साधना करवाते हैं लेकिन उनके अपने विशेष नियम भी हैं। उन नियमों का पालन आवश्यक है। 

(AIGWC//RK//Karthika//WhatsApp)

Friday, July 29, 2022

क्या तंत्र सिद्धियां भूल जाती हैं या बेअसर होने लगती हैं?

 क्यूं होता है ऐसा और क्या होता है उपाय 


हरिद्वार
29 जुलाई 2022 (तंत्र स्क्रीन डेस्क)::

तंत्र और साधना अलग अलग शब्द होते हुए भी काफी हद तक एक दुसरे से जुड़े हुए हैं। बहुत से संगठन हैं जहाँ साधना का मतलब ही तंत्र साधना है। यह बात अलग है कि साधक को चरणबद्ध तरीके से इसकी जेकरि दी जाती है। सिद्धियां मिलने पर भी उसे शांत और मौन रहना होता है। जो साधक ख़ुशी से ज़्यादा ही उछलने लगते हैं उनकी साधना का विकास भी रुक जाता है। जो साधक नियमित तौर पर गुरु से ली दीक्षा के मुताबिक साधनाकरते रहते हैं उन्हें अछे अनुभव अक्सर होने लगते हैं। उनके रुके हुए काम भी होने लगते हैं। मुख मंडल पर तेज और सिद्धि की चमक हबी दिखाई देने लगती है। आत्मविश्वास में हैरानीजनक वृद्धि होती है। 

दूसरी तरफ बहुत से साधकों को यह समस्या होने लगती है कि उन्हें कई बार कुछ वर्षों के बाद निराशा का सामना होना शुरू हो जाता है।  उन्हें  लगने लगता है कि उनके द्वारा की हुई सिद्धि अब काम नहीं कर रही। उनके तंत्र, मंत्र और हवन इत्यादि निरथर्क से लगने लगते हैं। जिस काम को लेकर सब कुछ किजा जाता है वह होता ही नहीं। जिसका आह्वान करते हैं उसके दर्शन भी नहीं होते। ऐसा सच में होता है। कोई आशंका या ग़लतफहमी नहीं होती। इसके कारण भी होते हैं। 

वास्तव में इसके पीछे कहीं न कहीं साधक अथवा साधिका की स्वयं की ही गलती होती है। जब जब भी अहंकार आने लगता है। सिद्धियों का गलत प्रयोग होने लगता है। निर्दोष मासूम लोगों का नुकसान होने लगता है तब तब सिद्धियों में भी व्यवधान आने लगता है और सिद्धियां भूलने भी लगती हैं। उनमे प्रमुख कारण है शक्ति के प्रयोग का विधि विधान भूल जाना। सिद्ध की हुई सिद्धि के मंत्र को भूल जाना अथवा कभी कभी मंत्र स्मरण का जाप भी याद न रहना। जब जब मंत्र नियमित तौर पर भी नहीं नहीं जपा जाता तब तब भी ऐसी समस्या आती है। तंत्र साधना में नियमित साधना आवश्यक है। 

ऐसी स्थिति तब तब भी विकट बनती है जब जब चरित्र की दुर्बलता आने लगती है। इसके अलावा सबसे प्रबल कारण है चरित्र से भटक जाना।  चरित्र के मार्ग से भटकते ही बुद्धि भर्मित रहने लगती है। उसे सही गलत का ज्ञान भूलने लगता है। ऐसी स्थित में अक्सर होता है कि कुछ अन्य महत्वपूर्ण सूत्र जो गुरु अथवा मार्ग दर्शक के द्वारा सिखाए गए होते हैं साधक उन्हें भी भूल जाता है। 

यह हालत बहुत बार दयनीय भी बन जाती है। बाहर से सब कुछ सही लगता है लेकिन साधक के अंदर की शक्ति खत्म हो चुकी है। ऐसी अवस्था में सिद्धि के होते हुए भी मनुष्य शक्तिहीन हो जाता है। इस स्थिति में जल्द ही संभला न जाए तो भौतिक और शरीरक समस्याएं भी आने लगती हैं।  

साधक का नाम तो अतीत में बन चूका होता है लेकिन वो न ही किसी पारलौकिक समस्या को ठीक कर सकता है न ही किसी के विषय में भूत काल से सम्बंधित घटनाओं को जान सकता है न ही स्वयं को ठीक कर पाता है।  ऐसे में गुरु का समरण ही उसे बचाता है। गुरु ही उसकी अशुद्धियां दूर कर के उसे शुद्ध करता है। साधना को फिर से करने के बाद ही उसे सिद्धियों की वापिसी मिलती है। ऐसा न करने पर उसका नाम पहले की तरह नहीं रहता। 

इस वापिसी के बिना साधक न ही भविष्य में घटित होने वाली सम्भावित घटनाओं का सही विश्लेषण भी नहीं कर सकता है। उसे खतरे का आभास होना भी बंद हो जाता है। उसके मन में निराशा, क्रोध और अन्य उपद्रव उठने लगते हैं। 

 इस लिए आवश्यक है कि सिद्धि प्राप्ति के बाद साधक को सदैव अभ्यास करते रहना चाहिए। उसे हमेशां नैतिक मूल्यों को याद रखना चाहिए। सिद्धि शक्ति के प्रयोगों का और समय समय पर हवन क्रियाओं द्वारा ऊर्जा को बढ़ाते रहना चाहिए। इससे उसकी सिद्धियां बनी रहेंगी , न केवल बनी रहेंगी बल्कि इनमें वृद्धि भी होगी। 

Friday, February 7, 2014

72 घंटे के अखंड हवन से शुरू मां बगलामुखी मंदिर का निर्माण

बगलामुखी मां की आराधना मात्र से दूर हो जाते हैं सारे संकट 
लुधियाना:6 फरवरी 2014: (तंत्र स्क्रीन टीम): 
बगलामुखी हवन यज्ञ का नाम बहुत ही रहस्य और भय युक्त श्रद्धा से लिया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से जहाँ पंजाब में शनि मंदिरों की संख्या बढ़ी है, गणेश जी की शोभा यात्रा, शिव भगवान की शोभा यात्रा, भगवान जगन्नाथ जी की शोभायात्रा और बाला जी का गुणगान तेज़ी से बढ़ा--हनुमान जी के मंदिरों में वृद्धि हुई है वहीँ बगलामुखी साधना के भक्त भी तेज़ी से बढ़े हैं। लुधियाना में भी भक्ति और तंत्र का यह रंग तेज़ी से ज़ोर पकड़ रहा है। गौरतलब है कि बगलामुखी तंत्र साधना से लोग वशीकरण, मारण, उच्चाटन आदि कार्यों को बखूबी अंजाम देते हैं। अपने मन की असाध्य और असम्भव चाहतों की बात को पूर्ण करने के लिए लोग इस तंत्र साधना का प्रयोग करते हैं और तंत्र-मंत्र पर विश्वास करने वाले लोगों का पूरी तरह यह मानना है की इससे बेहतर कोई अन्य विकल्प है ही नहीं। साधना करने वालों का कहना है कि बगलामुखी मां की आराधना मात्र से साधक के सारे संकट दूर हो जाते हैं और श्री में भी हैरानीजनक हद तक वृद्धि होती है। इसकी ताज़ा मिसाल है लुधियाना की पक्खोवाल रोड पर स्थित सिंगला एन्क्लेव इलाके के बहुत सुंदर मार्ग पर बनने वाला माँ बगलामुखी मंदिर। दो हज़ार गज़ जगह का यह टुकड़ा कुछ वर्ष पूर्व तक़रीबंद डेड करोड़ रुपयों में खरीदा गया था। उसके बाद कुछ समय और व्यतीत हुआ लेकिन अब मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है।  इस मकसद के लिए बाकायदा 72 घंटे का अखंड हवन यज्ञ कराया गया जिसके लिए विशेष नाथ जोगी भी बुलवाये गए। 
Video: लुधियाना में दो हज़ार गज़ जगह में बन रहा है मां बगला मुखी का मंदिर --वीडियो देखें 
इस गहन तांत्रिक साधना को जानने हैं कि स साधना से शत्रुओं का शमन होता है, लम्बे समय से चले आ रहे विवाद झटपट निपट जाते हैं। अपने ऊपर हो रहे अकारण अत्याचार से बचाव के मामले में भी इसे अचूक माना जाता है। कहते हैं कि अगर किसी को सबक सिखाना हो तो या फिर मुकद्दमा जीतना हो या फिर असाध्य रोगों से छुटकारा पाना हो, बंधनमुक्त होना हो, संकट और ऋण से उद्धार पाना हो तो इस साधना से बढ़कर और कुछ भी नहीं। साधना का मर्म जाने वालों का कहना है कि नवग्रहों के दोष से मुक्ति के लिए तथा किसी अन्य के टोने को बेअसर करने के लिए भी बगलामुखी हवन मंत्र यज्ञ इत्यादि संजिवनी बुटी हैं। तंत्र मंत्र में महारथ हासिल किए जानकार कहते हैं की बाहर के शत्रु जातक को उतना नुकसान नहीं पहुंचाते जितना सगे संबंधी पहुंचाते हैं लेकिन उनका अक्सर पता नहीं चलता। जब तक बात सामने आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। उस नाज़ुक हालन में 
भी बगलामुखी मां ही सहायक साबित होती है।
लेकिन यह साधना बेहद कठिन है। लगातार बारह बारह घंटे तक बिना कुछ खाये पिए इस हवन की तप्त अग्नि और आंसू ला देने वाले धूंए में बैठ कर हवन यज्ञ को परिपूर्ण करने वाले नाथ जोगी सत्य नाथ का कहना है कि अगर ज़रा सी भी चूक हो जाये तो बस सारा काम उल्टा भी हो जाता है। ज़रा सी चूक और और साधक का दिमाग ही चला जाता है। बगलामुखी साधना को पूर्ण करने के लिए निम्न बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए अन्यथा साधना अपूर्ण रह जाती है और इस अपूर्ण साधना से साधक को बेहद कष्ट भोगना पड़ता है। इसी लिए लोग बहुत डरते भी हैं इस साधना से। 
साधना के नियमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि यह एक बहुत ही  साधना है। इसमें नियमों का पूरा ध्यान रखना अतिआवश्यक है। नियमों का संक्षेप विवरण इस प्रकार है :
*बगलामुखी साधना करते समय पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन किया जाना चाहिए। इसमें ढील का कोई मतलब ही नहीं। 
किसी भी स्त्री को छुना, वार्तालाप करना यहां तक कि सपने में भी किसी स्त्री का आना इस साधना में पूर्णत: निषेध है। ऐसा न करने से साधना खण्डित हो जाएगी और साधक को कष्ट उठाना पड़ेगा।  इसलिए बहुत सात्विक जीवन जीने वाला ही इस साधना को कर सकता है। 
*यह किसी कमज़ोर दिल वाले के बस की साधना नहीं है। इस साधना को करने के लिए किसी डरपोक व्यक्ति या बच्चे का सहारा नहीं लेना चाहिए। जो लोग साधना करना चाहते हों पहले उन्हें खुद कि सात्विक और बलवान बना लेना चाहिए। बगलामुखी साधना करते समय साधक को कई तरह का डर भी लगेगा, विचित्र तरह कि बहुत सी आवाजें भी सुनायी देंगीं और बहुत से अन्य खौफनाक आभास भी हो सकते हैं लेकिन साधक को निडर और मज़बूत रहना होगा। श्रद्धा,और नियमों के पालन के बिना साधना परिपूर्ण नहीं होती। साधना जानने वालों का कहना है कि जिन साधकों/जातकों को काले अंधेरों और पारलौकिक ताकतों से भय लगता हो, उन्हें यह साधना कदापि नहीं करनी चाहिए वर्ण उनके लिए उल्ट परिणाम सामने आ सकते हैं। 
* नवरात्रि के दिनों में बगलामुखी साधना करना सबसे उत्तम फल देता है। मंत्रों का जाप शुक्ल पक्ष में करना अत्यन्त शुभ फल देता है। रात्री होते होते साधकों संख्या कम हो जाती है लेकिन उनकी वाणी और कृत्य में जोश आ जाता है। वे किसी दैवीय शक्ति का आभास देते हुए इतने ऊंचे सवर में बोलते हैं कि दूर दूर तक लगने लगता है न जेन कितनी बड़ी संख्या में भक्त बोल रहे हैं।  रात के सन्नाटे में इसका प्रभाव और भी बढ जाता है। इस मंदिर में भी रात का नज़ारा देखने वाला था।  दूर दूर तक अँधेरा और मंदिर के केंद्र में हवन यज्ञ की अग्नि में चमकते साधकों के चेहरे। 

* मंत्रों का जाप करते करते साधकों का स्वर अपने आप तेज होने लगता है ऐसा होने पर घबराने की कोई बात नहीं होती। यह एक अच्छा संकेत है। इसलिए बिना भटके मन को पूजा पाठ में हुए चिंतित हुए बिना अपना ध्यान मंत्रों पर केंद्रित रखें। तान मन दोनों में एक नयी शक्ति का आभास लगेगा। 

* इस साधना के नियमों के मुताबिक उत्तर की ओर मुंह करके बैठने के बाद ही साधना का आरंभ करें। इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं। साधक को सफलता मिलती है। 

* कहा जाता है भोजन, भजन और नारी तीनों पर्दे के अधिकारी लेकिन इस साधना में यह बात विशेष रूप से लागू होती है। इस साधना को गुप्त रूप से करें जल्द सफलता मिलेगी। जब तक साधना पूर्ण न हो जाए किसी से भी इस विषय पर वार्ता न करें। वाणी पर नियंत्रण भी इसके नियमों में है। 
* इसका विधिविधान भी विशेष है। साधना आरंभ करने से पूर्व अपने चारों ओर घी और तेल के दिए जलाएं।
*साधना करते वक्त पीले रंग के वस्त्र धारण करें और पीले रंग के आसन का ही उपयोग करें।
*उपवास सबसे अच्छा होता है। लेकिन अगर कठिन लगे तो अल्पाहार ही करें। 
*साधकों का अभियास भी होता है और उपवास के कारण उन्हें लघुशंका इत्यादि की समस्या होती ही नहीं भी  लेकिन अगर यत्ना ही पड़े तो दोबारा स्नान करके ही हवन में जाएं। 
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