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Tuesday, September 17, 2024

तंत्र मन्त्र से जीवन में सफलता कितनी सम्भव है

Tuesday 16th September 2024 at 6:45 PM

 यह आस्था और साधना की शिद्दत पर ही निर्भर करेगा 


लुधियाना: एक तपोबन और मंदिर भूमि:17 सितंबर 2024:( मीडिया लिंक//तंत्र स्क्रीन डेस्क)::

बहुत से मामले और बहुत सी बातें बिलकुल सच होते हैं लेकिन उनका सच दिखाई नहीं देता। उनका कोई सबूत भी नहीं होता। उन्हें साबित करना संभव नहीं होता। बहुत से मामलों में सच जैसा कुछ दिखाई तो देता है लेकिन होता वह झूठ ही है। विज्ञान की प्रयोगशाला में सब कुछ साबित करना संभव भी नहीं होता। यही सच्चाई तंत्र मंत्र और यंत्र के प्रयोग पर भी लागू होती है। इसे विश्वास  नहीं  सवालों के चश्मे से देखना उचित भी नहीं क्यूंकि तंत्र मंत्र उन लोगों के बिगड़े हुए काम ज़रूर बना देते हैं जिनका आत्म विश्वास डगमगा चुका होता है। जिन्हें खुद पर विश्वास नहीं रहा होता। तंत्र मंत्र उन्हें फायदा पहुंचाते हैं। 

इसी तरह के ढंग तरीकों से उनके मन की एकाग्रता भी बढ़ती है और दिमाग की भी। तंत्र-मंत्र-यंत्र और साथ में  सामूहिक जाप उनमें शक्ति जगाता है। यह जाएगी हुई शक्ति ही उनमें एक नए जोश का संचार करती है। आप इस शक्ति को कोई भी नाम दे सकते हैं। वैसे जिस शक्ति के नाम से जाप हो रहा होता उस समय साधक के सामने वही शक्ति साकार  हुई होती है।  अल्पकाल की सिद्धि भी कह सकते हैं। जाप रोज़ हो रहा हो तो यही स्थाई सिद्धि भी बन जाती है। 

तंत्र मन्त्र और यंत्र का प्रयोग यूं तो व्यक्तिगत और आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। लेकिन आजकल हर रोज़ की ज़िन्दगी में आने वाली छोटी मोती ज़रूरतों के लिए भी इस तरह के प्रयोग होने लगे हैं। वास्तव में यह एक प्राचीन पद्धति है जो विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति और अभिप्रेत शक्तियों के प्रकटीकरण के लिए उपयोगी मानी जाती है। इसके वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक आधार होते हैं। अगर कोई व्यक्ति आध्यात्मिक तौर पर जाग जाता है तो उसके काम खुद-ब-खुद बनने लगते हैं। उसके सामने कोई गलत व्यक्ति आने से घबराने लगता है। शक्ति का जागना यही होता है। 

तंत्र मन्त्र का प्रभाव व्यक्ति के निश्चित उद्देश्यों और उपास्य देवता/शक्ति के संबंध में भी निर्भर करता है। कुछ लोग इसे अपने साधना और स्वयं सुधार के लिए उपयोग करते हैं, जबकि दूसरे लोग यह उपयोग विशेष प्रभावों, जैसे धन, स्वास्थ्य, संघर्ष, प्रेम आदि की प्राप्ति के लिए करते हैं। इस तरह के दुनियावी काम तो अपने आप बनने लगते हैं। उनका प्रभामंडल भी सुधरने लगता है। चेहरे की चमक भी बढ़ जाती है। 

तंत्र मन्त्र के प्रभाव को व्यक्ति के श्रद्धा, विश्वास, साधना की क्षमता, उचित नियमों का पालन और निरंतरता प्रभावित कर सकते हैं। तंत्र मन्त्र की सफलता परिणाम व्यक्ति की अन्तरंग स्थिति, कर्म, दैवीय अनुमति आदि पर भी निर्भर करते हैं। साधक अंदर से जितना शुद्ध और सच्चा होगा उसे फायदा भी उतना बड़ा और जल्दी होने लगेगा। जो साधक साधना में ईमानदार नहीं होते उनकी साधना फलित नहीं होती।  मामला उल्टा भी पढ़ जाता है। 

हालांकि, तंत्र मन्त्र का उपयोग करने के दौरान सभी सावधानियां और सम्पूर्णता के साथ कार्य किया जाना चाहिए। यह मान्यता है कि तंत्र मन्त्र का दुरूपयोग अनुकरणीय प्रभावों के साथ आएगा और इससे दुष्प्रभाव भी हो सकता है। यह सब साधक की नीयत पर निर्भर करता है।  साफ़ है तो आपके  परिणाम भी जल्द आने लगेंगे। 

सफलता व्यक्ति की साधना, अध्ययन, कर्म और परिश्रम पर निर्भर करती है। तंत्र मन्त्र का प्रयोग उन लोगों द्वारा किया जाता है जो निरंतर अभ्यास करते हैं, शिक्षा प्राप्त करते हैं, आदर्शों का पालन करते हैं और नियमित रूप से अपनी साधना को जारी रखते हैं। निरंतरता और शुद्धता इस मामले में बहुत महत्व रखती है। 

च्छी गुरुभक्ति, निष्ठा, निरंतरता और सम्पूर्णता के साथ तंत्र मन्त्र के प्रयोग से सफलता की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन इसका प्रयोग समय-समय पर अनुभवित और निश्चित गतिविधियों के साथ ही करना चाहिए। परंतु एकदिवसीय प्रयासों से मानसिक, शारीरिक या आर्थिक अभिवृद्धि की प्राप्ति निश्चित नहीं होती है। यह एक संशोधित प्रकृति और प्रयोग के लिए अवधारित कार्य है जो समय, तत्परता और समर्पण की मांग करता है। शिद्दत के साथ पूरा समर्पण, पूरी भक्ति, पूरी शुद्धता अगर हैं तो आप का मकसद सफल रहेगा। 

आप अगर ईमानदारी से समर्पित हो कर साधना करते हैं तो यकीन रखिए फायदे भी ज़रूर होंगें। शक्ति जागेगी तो आपको इसका अहसास भी कराएगी। 

Monday, December 30, 2019

ओशो कहते हैं-तन्त्र तीन तरह के होते हैं--स्वामी ध्यान सुमित

तंत्र  के गहन रहस्यों पर ओशो ने क्या कहा--सुनिए!
लुधियाना की हंभडां रोड पर स्थित ओशो आश्रम में 29  जुलाई 2018 की रात्रि को रेक्टर कथूरिया द्धारा क्लिक की गई तस्वीर 
लुधियाना: 30 दिसंबर 2019: (तंत्र स्क्रीन टीम)::
ओशो एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी बातें लगातार सच जो साबित हो रही हैं। ओशो को मानने वाले कई गुटों  में बंट चुके हैं लेकिन इसके बावजूद ओशो  बढ़ रहा है। ओशो ने सत्य कहा था। ओशो के बाद ओशो  गैर मौजूदगी में ओशो की मौजूदगी और भी मज़बूत हो रही है। ओशो की बातें आडियो, वीडियो और प्रिंट माध्यमों के ज़रिये सभी झूठों और भर्मों का पर्दाफाश करती हैं जो जाने अनजाने  फैलाये जाते हैं। स्वामी ध्यान सुमित  से मुलाकात हुई लुधियाना में। ओशो के हवाले दे कर वह हर उस सवाल का जवाब देते हैं जो उनसे किया जाता है। तंत्र पर चर्चा शुरू हुई तो वह बोले तंत्रतीन तरह के होते हैं।  प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत का वीडियो जिसमें आप कई और बातों की चर्चा भी देख सुन सकेंगे। इस मुलाकात के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे थे रेक्टर कथूरिया और एम एस भाटिया ने। 
 है। 

Thursday, April 18, 2013

पीरखाना में मेले के लिए संगत पहुंचनी शुरू

पीरखाना लुधियाना में मेले की सभी तैयारियां मुक्कमल 
के लिए सजाई गई ढाई एकड़ जमीन भी कम पड़ने की आशंका
 तन्त्र, मन्त्र, भक्ति और अध्यात्मिक ढंग तरीकों से लोगों को राहत प्रदान करने के मामले में तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है लुधियाना का न्यू अग्रवाल पीरखाना और इस दरबार के मुख्य सेवादार बंटी बाबा। श्री लखदाता पीर जी निगाहें वाले का जन्म दिन इस बार भी बहुत धूमधाम से मनाया जा रहा है। बंटी बाबा की देख रेख और मार्गदर्शन में लुधियाना के न्यू अग्रवाल पीरखाना में इस बार भी यह मेल पूरे जोशो खरोश के साथ लग रहा है। इस बार लगने वाले मेले का स्वरूप पहले के सभी मेलों से विशाल होगा। आयोजन की सफलता के लिए बनी गई अलग अलग टीमें कुशलता से अपना अपना काम कर रही हैं। मेले की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। लुधियाना के गली बाजारों में एक बार फिर उत्साह पूर्ण चहल पहल है। मेले से पहले ही मेले का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि इस बार मेले में सूफी गायन को नई बुलंदियों पर पहुँचाने वाले गुरदास मान भी विशेष तौर पर पहुँच रहे हैं। बाबा जी की पवित्र चादर अजमेर शरीफ से लाई जा रही है। लोगों के उत्साह को देखते हुए इस बार ढाई एकड़ जगह केवल पंडाल के लिए ले ली गयी है। इस सम्बन्ध में निकलने वाली भव्य रथ यात्रा को लेकर भी संगत में भारी उत्साह है। यह रथ यात्रा 20 अप्रैल को दरेसी मैदान से चलेगी और अपने रूट से होती हुई पीरखाना पहुँच कर विश्राम करेगी। अगले दिन अर्थात 21 अप्रैल को सुबह साढ़े दस बजे चादर की रस्म होगी।इसके बाद 11बजे झंडे की रस्म होगी और इसके तुरंत बाद दोपहर को एक बजे केक काटा जायेगा। शाम होते होते चार बजे होगी मेहँदी की रस्म और पांच बजे शुरू होगी सूफियाना शायरी की महफिल। सूफी गायन की मस्ती के ये प्याले अगले दिन 22 अप्रैल को भी छलकेंगे। मस्ती की इस महफिल में गुरदास मान के साथ ही हंसर हयात निजामी, अनीस साबरी, शकील साबरी, सरदार अली, अमित धर्मकोटी, राकेश राधे, ललित गोयल, टोनी सुल्तान और बहुत से अन्य कलाकार। सूफी एंकर हेमंत वालिया मंच संचालन करेंगे। दूरदराज से  आने वाली संगत के लिए विशेष प्रबंध किये गए हैं तांकि किसी को भी कोई असुविधा न हो।-रेक्टर कथूरिया 
पीरखाना लुधियाना में मेले की सभी तैयारियां मुक्कमल