Media Link on Sunday 25th January 2026 at 2:30 AM Regarding Ketu in Tantra Screen
लेकिन केतु के हिसाब किताब भी बहुत बारीकी वाले होते हैं
लुधियाना: 25 जनवरी 2026: (मीडिया लिंक 32//तंत्र स्क्रीन डेस्क)::
राहू को शायद आम तौर पर अधिक लोग जानते हैं। हालांकि केतु की शक्तियां भी कम नहीं होती लेकिन राहू की प्रकृति ही ऐसी है कि वह लोगों के दिलों पर राज करने वाली स्थिति में जल्दी पहुँच जाता है। हालांकि केतु महाराज भी कम नहीं हैं। कई बार केतु ही कमाल करता है। केतु की अपनी क्षमता है जिसकी विशेषता बिलकुल ही अलग है। जो लोग भोग विलास को छोड़ने की कल्पना भी नहीं कर सकते उन्हें केतु ही सदमार्ग दिखाता है। उस समय केतु की बात मान कर ही ज़िंदगी के सही राह नज़र आते हैं। कई बार जीवन तक का संकट केतु की कृपा से ही दूर होता है। ऐसे में चिंतन मनन बहुत बढ़ जाता है। वह भी इतना ज़्यादा कि कई बार जातक सन्यास लेना ही सही समझता है। वत्व होता यह सब उन कर्मों का ही फल है जो जातक का मन इस शरीर के ज़रिए करता है। आम तौर पर तब जब केतु शरीर को बहुत से कष्ट देने लगता है। 
साभार तस्वीर
केतु के हिसाब किताब भी बहुत बारीकी वाले होते हैं। मीन राशि (Pisces) में पंचम भाव (5th House) में केतु (Ketu) की स्थिति व्यक्ति को आध्यात्मिक, रचनात्मक और अंतर्ज्ञानी बनाती है, लेकिन यह प्रेम, संतान और शिक्षा के मामलों में चुनौतियां दे सकती है। व्यक्ति को मानसिक तनाव, संतान संबंधी देरी या समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, हालाँकि, यह स्थिति व्यक्ति को गूढ़ विद्याओं और रिसर्च में गहरी रुचि भी दे सकती है जो सभी के नसीब में नहीं होती। इस रूचि के चलते ही करियर में अचानक सफलता मिल सकती है पर साथ ही यह ज़रूरी है कि अहंकार त्याग कर काम किया जाए। इस त्याग के बाद ही होते हैं कमाल। केतु जब कमाल करता है तो वह समय भी हैरानकुन होता है। सचमुच कमाल से भी बड़ा कमाल कर देता है।
केतु की प्रकृति की चर्चा करें तो इसके बहुत से सकारात्मक पहलू भी हैं जिन्हें अंग्रेज़ी में हम लोग अक्सर Positive Aspects कहते हैं। केतु के प्रभाव में आए व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास भी होने;लगता है। कई बार तो आध्यात्मिक विकास बहुत तेज़ी से होने लगता है। यह स्थिति इतनी तेज़ी से बदलती है की व्यक्ति को आध्यात्मिक बनाती है और किसी दिव्य रंग में रंगती महसूस होने लगती है। इसके साथ ही रहस्यवाद और गूढ़ विद्याओं में भी रुचि बढ़ाती है।जिससे इंसान कुछ का कुछ बन जाता है। उसे दैवी कृपा बरसती महसूस होने लगती है।
केतु जब अपने ढंग तरीके से अपना प्रभाव डालता है तो रचनात्मकता और बुद्धिमत्ता भी तेज़ी से बढ़ने लगती है। इसका परिणाम यह होने लगता है कि व्यक्ति बहुत क्रिएटिव होना शुरू हो जाता है। उसमे रिसर्च और विश्लेषण करने की क्षमता का गन भी आने लगता है। सिर्फ आता ही नहीं तेज़ी से विकसित भी होने लगता है। उसकी शख्सियत आकर्षक भी बनने लगती है और वह दूसरों को प्रभावित भी करने लगता है। लोग उसकी बात मानने भी लगते हैं। उसकी लोकप्रियता भी बढ़ने लगती है। इन सब के परिणामस्वरूप उनकी आमदनी में भी वृद्धि होने लगती है। पैसा आने से उसे मिली सफलता की चमक भी पूरी दुनिया की नज़र में भी आने लगती है। देहते ही देखते वह छाने भी लगता है।
करियर के मामले भी केतु के प्रभाव में आए सबंधित व्यक्ति की तरक्की होने लगती है। सफलता बहुत तेज़ी से उसके कदम चूमने लगती है। अंतर्दृष्टि और सहायता की आवश्यकता वाले करियर जैसे कि ज्योतिष, रिसर्च, हीलिंग इत्यादि में सफलता बहुत तेज़ी से मिल सकती है। लेकिन यहां यह भी ज़रूरी है कि ऐसी स्थिति में अहंकार का त्याग आवश्यक है। अहंकार त्यागने पर ही करियर में चमक आती है।अहंकार को केतु बाबा भी अच्छा नहीं समझता।
इसके साथ ही रिश्तों में गहराई भी आने लगती है। रिश्ते में अंतरंगता और गहराई की इच्छा भी बढ़ती है। गहराई बढ़ने से रिश्ते बहुत अच्छे होने लगते हैं। रिश्ते अच्छे होते हैं तो काम भी बनने लगते हैं और जीवन में सफलताएं मिलने लगती हैं।
सकारत्मक पक्ष की तरह केतु महाराज के भी नकारात्मक पहलू होते हैं। इनकी गंभीरता भी कम नहीं होती। ज़िन्दगी भर इनका भी असर पड़ता है। इनमें संतान संबंधी चिंताएँ प्रमुखता से छै रहती हैं। ऐसे में संतान प्राप्ति में देरी या समस्याएं भी हो सकती हैं या फिर संतान से जुड़ी चिंताएँ भी रह सकती हैं। अगर संतान की चिंता लग जाए तो पूरी ज़िंदगी पर इसका प्रभाव पड़ता है। ऐसे बहुत से मामले देखे हैं। केतु महाराज की पूजा अर्चना से उन्हें फायदा भी हुआ।
केतु जी नाराज़गी के सुर में हों तो मानसिक तनाव भी बढ़ने लगता है। लोगों से दूर हो कर एकांतप्रियता का विचार छाने लगता है। धैर्य की कमी होने लगती हैजिसके परिणाम स्वरूप काम बिगड़ने लगते हैं। यह सब देर तक रहे तो मानसिक तनाव या अवसाद का सामना भी करना पड़ सकता है।
दोस्ती के साथ साथ प्यार और रिश्ते भी केतु से प्रभावित होते हैं। कई बार तो बहुत बुरी तरह से भी प्रभावित होते हैं। केतु जी नाराज़ हैं तो प्रेम संबंधों में उतार-चढ़ाव या कर्मिक बाधाएँ आ सकती हैं। इंसान सोचता ही रह जाता है कि सुबह तक तो सब ठीक ठाक था अब अचानक यह सब क्या हुआ कि सब कुछ उल्टपुल्टा हो गया।
मोहतरमा अंजुम रहबर साहिबा की पंक्तियाँ याद आ रही हैं :
मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था
वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था। ऐसी बहुत सी बातें सिर्फ शायरी में ही नहीं बल्कि हकीकत में भी सच होती हैं। ऐसा बहुत बार सच होते हुए अपनी आँखों से भी देखा।
केतु अगर प्रकोप दिखाने लगे तो स्वास्थ्य से सबंधित बहुत सी समस्याएं भी खड़ी होने लगती हैं। कई बार स्वास्थ्य की स्थिति चिंताजनक हद तक बिगड़ने लगती है। स्वास्थ्य में बिगाड़ अत है तो पेट और पाचन संबंधी समस्याएं गंभीर हो कर खड़ी होने लगती हैं। स्वास्थ्य की चिंता को लेकर कई और खतरे भी बढ़ने लगते हैं। इन खतरों में से एक खतरा है ऊँचाई से गिरने का खतरा। इस तरह गिरने से गंभीर चोट भी लग सकती है। इसलिए केतु जी से बना कर रखो। बना कर रखो का मतलब उनके कहे में रहो। नहीं रहोगे तो वह अपने ढंग से मनवा लेंगें।
यहां यह भी याद रखने वाली बात है कि मीन राशि में पंचम भाव का केतु एक जटिल स्थिति है, जो आध्यात्मिक और बौद्धिक गहराई के साथ-साथ भावनात्मक और पारिवारिक चुनौतियों को भी जन्म देता है, जिसके लिए ध्यान, धैर्य और अहंकार त्यागने की आवश्यकता होती है ताकि इसके शुभ प्रभावों को बढ़ाया जा सके। केतु का प्रभाव बहुत ही संवेदनशील क्यूँ और कैसे होता है इसकी चर्चा भी की जाएगी लेकिन जल्द ही किसी अलग पोस्ट में।
